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]]>Brain Recoding Franchise, India’s Fastest Growing Brain Training Company – ब्रेन रीकोडिंग IITians द्वारा शुरू की गयी वह कंपनी है जिससे आप बहुत कम इन्वेस्टमेंट 75,000 रूपए (सिर्फ पहली 500 फ्रैंचाइज़ी के लिए) खर्च करके हर महीने कम से कम पचास से साठ हज़ार रूपए हर महीने कमा सकते हैं, और कंपनी आपको किट, प्रोडक्ट्स, ट्रेनिंग, स्टेप बाई स्टेप फ्रेम वर्क के साथ साथ 2 साल तक पूरा सपोर्ट सिस्टम देती है। फ्रैंचाइज़ी में दिए जाने वाले ब्रेन जिम प्रोग्राम की मात्र 45 मिनट की पहली ही क्लास में बच्चों का ब्रेन इतना एक्टिव हो जाता है कि बच्चे आँखों पर पट्टी बांधकर कलर बताने लग जाते हैं, करीब 7 दिनों की ट्रेनिंग से बच्चे आँखों पर पट्टी बांधकर किताब पढ़ने लग जाते हैं और 14 दिनों की ट्रेनिंग से करीब 7-10 फ़ीट की दूरी से बंद आँखों से पहचानने लग जाते हैं यह सभी रिजल्ट्स देखने के लिंक पर क्लिक करके वीडिओ देखें –
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ब्रेन रीकोडिंग कंपनी के साथ जुड़कर आप सिर्फ ये फ्रैंचाइज़ी नहीं लेंगे बल्कि एक ऐसी तूफानी और सफल लोगों की टीम का हिस्सा बनेंगे जहाँ आप सिर्फ बड़े सपने देखेंगे ही नहीं बल्कि उनको पूरा पाएंगे, सफलता पाने के लिए सफल लोगों के साथ जुड़ना बहुत जरुरी है, जिस हिसाब से ब्रेन रीकोडिंग कंपनी की ग्रोथ हो रही है उस हिसाब से अगले 2 -3 वर्ष में कंपनी और इससे जुड़े हुए लोग करीब 10,000 करोड़ रूपए का बिज़नेस करेंगे, बेहतर होगा अगर आप भी इसका हिस्सा शुरुआत में ही बन जाएं क्योंकि बाद में सिर्फ पछतावा ही रह जाता है।
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गजेंद्र सिंह जो कंपनी के फाउंडर हैं इनका मानना ये है कि एक ऐसा ईको सिस्टम भारत में बनाना है जिससे करोड़ों लोगों को एक मौका मिले जिससे कि वे फाइनेंसियल फ्रीडम के साथ अपनी जिंदगी अच्छे से जी सकें एवं दूसरों की मदद भी कर सकें। शिक्षा एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें असीमित स्कोप है साथ ही हमारे पास एक मौका है आने वाले बच्चों के भविष्य को बदलने में एक हिस्सा बनने का, उनके जीवन में पॉजिटिव बदलाव लाने का जिससे बच्चे काबिल बन सकें, अपने पैरों पर खड़े हो सकें, माइंडसेट पर काम कर सकें, अपनी स्किल्स पर काम कर सकें और बेहतर जीवन जी सकें और एक बेहतर समाज बना सकें।
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जब आप ब्रेन रीकोडिंग कंपनी की फ्रैंचाइज़ी लेते हैं तो आपको पेरेंट्स को क्या दिखाना है क्या बोलना है वे सभी चीजें आपको ट्रेनिंग के माध्यम से बताई जाती हैं और वे सभी फाइल, ऑडियो, वीडिओ ट्रेनिंग एवं डिजिटल प्रोडक्ट्स आपको फ्रैंचाइज़ी किट के साथ दिए जाते हैं जिससे आप पहले महीने में ही आपकी पूँजी निकाल सकें। अगर किसी कारण से आप इनकम नहीं कर पाते हैं तो कंपनी 100% रिफंड की गारंटी देती है साथ ही कंपनी किसी भी प्रकार की रॉयल्टी चार्ज नहीं करती है, इसके बाद भी हम आपको ये सलाह देते हैं कि सबसे पहले आप इस फ्रैंचाइज़ी के बारे में 9257 00 7834 नंबर पर कॉल करके अथवा मैसेज करके अच्छे से समझें पूरा प्रपोजल ध्यान से पढ़ें, अगर संभव हो तो हमारे ऑफिस में विजिट करें और पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद आगे कदम बढ़ाएं।
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ब्रेन रीकोडिंग कंपनी में कई तरह की इनकम रहती हैं और इतना सिंपल सिस्टम बनाया गया है कि पांचवीं क्लास का बच्चा भी इस फ्रैंचाइज़ी को चला सकता है, यह फ्रैंचाइज़ी आपके घर के एक छोटे से कमरे से शुरू की जा सकती है, जिसे कोई भी शुरू कर सकता है और पहले ही महीने से इनकम आना शुरू हो जाएगी इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए हमें 9257007834 नंबर पर कॉल करें अथवा Whatsapp पर भी मैसेज कर सकते है।
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]]>हम भारतीय खाने के बहुत शौक़ीन होते हैं। हम सभी वैसे तो खाने के लिए तो कई तरह के व्यंजन पसंद करते हैं । लेकिन जब पानी पूरी (Pani puri) की बात आती है, तो नाम सुनकर ही मुँह में जैसे पानी की बौछार सी हो जाती है। इस लोकप्रिय व्यंजन को हम गोलगप्पा, फुचका और भी कई नामों से जानते हैं। वैसे पानी पूरी का व्यापार अपने भारत में लगभग हर जगह किया जाता है। चाहे वह गली हो या मोहल्ला , चौक हो या चौराहा कहीं न कहीं आपको पानी पूरी का व्यवसाय करते हुए कुछ लोग तो जरूर नजर आ ही जायेंगे । यह Business Idea इतना आसान है कि कोई भी इस बिज़नेस को बहुत ही कम पूँजी लगाकर भी बड़े आसानी से शुरू कर सकता है।(How to start pani puri Business) मैं कुछ लोगों को जनता हूँ जो इसका व्यापार लम्बे समय से कर रहे हैं और भारी मुनाफ़ा कमा रहे हैं। इसके लिये आप नीचे दिया हुआ विडियो जरूर देखे
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पानीपूरी या गोलगप्पा (Golgappa) एक पारंपरिक भारतीय Street Food है, जिसमें उबले हुए आलू, कटे हुए प्याज, छोले और भारतीय मसाले के मिश्रण से भरी एक गोल, खोखली पूरी होती है, जो मुख्यतः गेहूं के आटे या सूजी से बनी होती है।
आमतौर इसे इमली, सौंठ, लहसन, पुदीना और भी अलग-अलग तरह के स्वाद वाले (Pani puri ka pani) पानी के साथ लोगों सामने परोसा जाता है। एक दशक से भी अधिक समय से, पानीपुरी (Pani puri) या गोलगप्पा (Golgappa) अपने भारत के सबसे लोकप्रिय Street Food में से एक है , जिसे दुनिया भर के लोग पसंद करते हैं।
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लोकप्रिय Street food Panipuri को बच्चे हो या बड़े , महिलाएँ हों या पुरुष सभी बड़े चाव से खाते हैं । लेकिन पानीपुरी की खट्टी-मीठी स्वाद सबसे ज्यादा महिलाओं के बीच में काफी लोकप्रिय है, और इसे महिलाएं खाना ज्यादा पसंद करतीं हैं।
आगे हम जानेंगे कि कम से कम पूँजी लगाकर भी कोई पानी पूरी के व्यवसाय को कैसे शुरू कर सकता है How to Start Pani puri Business in Hindi, और कैसे हमेशा ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कैसे कमा सकता है ? Pani Puri Business Case Study
अगर आपके पास बजट की कमी है तो आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। कम पूंजी के साथ भी पानी पूरी के व्यवसाय को आप इस प्रकार शुरू कर सकते हैं :-
1- ठेलागाड़ी पर पानी पूरी का बिज़नेस
2- पानी पूरी होलसेलर बनकर
३- पानी पूरी का दुकान खोलकर
4- बॉक्स में डालकर
5- पानी पूरी केवल सेक कर अन्य व्यवसायियो को बेच सकते है
पानी पूरी बनाने में प्रयुक्त होने वाली कच्ची सामग्री आपको हर जगह बड़े ही आसानी से मिल जाएगी। इसको बनाने में ज्यादा चीजों की कोई आवश्यकता नहीं होती है।
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इसमें कुछ मुख्य सामग्रियों के नाम व मूल्य नीचे दिए गए हैं। आपके शहर के अनुसार इसके मूल्य भिन्न हो सकते हैं।
मात्रा | मात्रा |
---|---|
तंदूरी आटा | दिन की खपत के अनुसार |
सूजी/रवा | दिन की खपत के अनुसार |
तेल | दिन की खपत के अनुसार |
गोलगप्पे के पानी में प्रयुक्त होने वाली कुछ सामग्री दी गयी हैं :-
इमली की मात्रा – सामान्य तौर पर 6 लीटर पानी में 250g इमली की आवश्यकता होती है।
दिन की खपत के अनुसार
इसमें आपस्वादानुसार बदलाव कर सकते हैं।
नीचे कुछ पानी पूरी मसाला के सुझाव दिए गए हैं जिसे इस्तेमाल करने के बाद आपकी पानी पूरी का स्वाद सबसे अलग और स्वादिष्ट बन जाएगी ।
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आमतौर पर 1 किलोग्राम आटा / सूजी या मैदा से लगभग 105 से 115 तक आसानी से पूरी तैयार हो सकती है।
तो इस हिसाब से अगर प्रतिदिन 5000 गोलगप्पे का उत्पादन करना हो तो आपको 45 से 50 किलो सूजी या आटें की आवश्यकता होगी।
पानी पूरी तैयार करने की सभी सामग्री आपको आपके नजदीकी किराने की दुकान या होलसेल की दुकान में आसानी से मिल जाएगी।
हालांकि सामान की मात्रा अधिक है और काम एक दिन का तो है नहीं। इसलिए आप इसे होलसेलर से ही खरीदेंगे तो कुछ कम कीमत पर ही सारा सामान मिल सकता है।
वैसे तो आप शुरुआत में कम बजट के साथ अपने हाथों से हीं गोलगप्पे की पूरी बना सकते हैं। मैं कुछ लोग को जानता हूँ जो अपने हाथों से ही पानी पूरी तैयार करते हुए इस व्यापार में हैं। बस आपको जरूरत है कुछ और लोगों को साथ में लेने की।
हम इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि इसे हाथों से बनाना एक थकाऊ प्रक्रिया है। लेकिन आगे हम ये भी जानेगें कि हाथों से ही कम समय में ज्यादा पानी पूरी कैसे बना सकते हैं?
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हालांकि आप अगर बड़े पैमाने पर इसकी शुरुआत कर रहे हैं तो आपके लिए गोलगप्पे बनाने की ऑटोमेटिक मशीन एक अच्छा विकल्प है।
इस बिज़नेस में आपको कुछ महत्वपूर्ण मशीनों की आवश्यकता होगी जिससे आपको कई तरह के फायदे मिलेंगे। जैसे –
मशीन – आपको आटा गुथने के लिए मिक्सर और बेलकर पूरी तैयार करने के लिए ऑटोमेटिक मशीन की अवश्यकता होती है।
जहाँ तक पानी पूरी तैयार करने वाली मशीन के कीमत की बात है तो पानी पूरी का आटा गूंथने में जिस मशीन का उपयोग किया जाता है वह आपको ₹20,000 – ₹25,000 रुपये में आसानी से मिल जाएगी।
साथ ही पानीपूरी तैयार करने के लिए जिस ऑटोमेटिक मशीन की आवश्यकता होती है। जिसे ₹40,000 से ₹50,000 रुपये तक आसानी से खरीदी जा सकते हैं ।
आमतौर पर पानी पूरी तैयार करने वाली मशीन को आपको किसी भी लोकल मार्केट या किसी मशीनरी की दुकान में अवश्य मिल जाएगी।
यही अगर आप इसे ऑनलाइन मार्केट जैसे Amazon ,फ्लिपकार्ट या India मार्ट से खरीदेंगे तो आपको ढेरों डिस्काउंट ऑफर्स के साथ कम कीमत पर ही सारी चीजें मिल सकती है।
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हालांकि अभी तक दी गई जानकारी से आप आसानी से तो समझ हीं चुके होंगे कि पानी पूरी तैयार करने के लिए किस- किस चीजों की आवश्यकता होती है? और कैसे होती है ? अब हम जानेगें की पानीपुरी को तैयार कैसे किया जाता है –
अभी के समय में बाजारों में आपको अलग-अलग फ्लेवर के पानीपूरी/गोलगप्पे (Different Flavored Pani Puri) देखने को मिल जाएंगे लेकिन फिर भी इसे बनाने की प्रक्रिया काफी हद तक अपरिवर्तित रहती है।
जहाँ तक बात है हाँथों से पानी पूरी तैयार करने की तो हम सभी जानते हैं की यहाँ मशीन की अपेक्षा ज्यादा समय लगेगा।
वैसे हाथों से पूरे Process में आपको 4-6 घन्टें का समय लग सकता है। लेकिन पूरी प्रकिया केवल आप निर्भर करती हैं कि आप सभी काम को किस तरह करते हैं या करवाते हैं ।
हम सभी इस बात को जानते हीं हैं कि जब किसी काम में मशीन के उपयोग करने की आती है तो जाहिर सी बात है कि कम समय में ज्यादा काम होगा।
तो आइए जानते हैं कि हम मशीन का उपयोग करके पानी पुरी को कैसे तैयार कर सकते हैं –
• जाहिर सी बात है कि मशीन से कम समय में काम ज्यादा और जल्दी होगा।
• अगर समय की बात करें तो यह भी मशीन पर निर्भर करता है कि उसकी क्षमता कितनी है ।
• देखा जाए तो औसतन मशीन 1 घण्टे में 4000 से 4100 गोलगप्पे तैयार कर सकती है।
• जहाँ तक बात पानीपुरी के बिज़नेस को शुरू करने की है तो आमतौर पर इसकी सारी सामग्री , जैसे आँटा या सूजी , इमली ,पानी , मसाले, बिजली इत्यादि को मिलाकर प्रतिदिन लगभर ₹2000 से ₹2400 तक खर्च आ जाता है।
• अगर ठेले (4 पहियों वाला) की कीमत की बात करें तो यह आपको ₹15000 से ₹20000 तक आ जायेगी। ये बस एक बार की इन्वेस्टमेंट है।
• जहाँ तक बात कमरे की है तो बताते चलें कि आप इसे अपने घर के किचन से भी शुरू कर सकते हैं।
• लेकिन फिर भी अगर मशीन रखने या अन्य कामों के लिए आप आसानी से 10×12 के कमरे से शुरुआत कर सकते हैं।
इस व्यापार में अगर आप दिन के 6 घण्टे से 8 घण्टे भी काम करेंगे तो आपको प्रतिदिन ₹6000 से ₹8000 तक कमाई आसानी से हो सकती है।
• इस तरह आप लगभग ₹2,40,000 तक महीने के कमाई कर सकते हैं।
• हालांकि यह व्यवसाय फ़ूड और बेवरेज (Food And Beverage) के कैटेगरी में आती है इसलिए अगर आप बड़े स्तर से शुरुआत कर रहें हैं तो आपको अपने व्यवसाय के लिए अलग अलग प्रकार के रेजिस्ट्रेशन और लाइसेंस की आवश्यकता हो सकती है जैसे –
आज के समय सभी जगहों पर कम्पटीशन बढ़ गई है। इसके बावजूद कई लोग बिज़नेस शुरू करने के साथ-साथ बहुत पैसे बनाने लग जाते हैं। वो ऐसा क्या करते हैं जिससे उनको उनके नए बिज़नेस में सफलता मिल जाती है। आगे हम संक्षेप में जानेंगे कि Pani puri के व्यवसाय में कैसे सफल हों ?
पानीपुरी के व्यवसाय में सफल होने के लिए आपको कई छोटी छोटी बातों का ध्यान देना होगा जैसे –
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]]>Embarking on a venture to start a MOP making business requires an entrepreneur who possesses commitment, creativity, and dedication to producing top-quality MOPs. The manufacturing process entails selecting optimal raw materials, precision cutting and skilful attachment of necessary components to yield durable and efficient MOPs. Additionally, the entrepreneur interested in venturing into this business must conduct a market research to discern consumers’ needs, competition and market trends.
This blog post endeavours to offer insights into the MOP making business, emphasizing critical steps required to establish, operate, and sustain it. We will explore the factors that influence the business’s success.
The MOP making business holds huge market potential, mainly due to the impact of rapid urbanization. The demand in both urban and rural markets has made it a profitable business venture. MOPs are used for various indoor and outdoor cleaning purposes, and their demand has increased because of heightened awareness of maintaining cleanliness and hygiene. As disposable products are more expensive, people now opt for more sustainable options such as MOPs that can be reused multiple times. Therefore, starting a MOP making business is a wise decision, as it offers a promising opportunity for growth and profit in today’s market.
A MOP making business is an opportunity for entrepreneurs looking to start their venture with low investment. The required raw materials include MOP Yarn, MOP Pipe, MOP Clip, and packaging covers, and they are readily available from Large Scale Producers. Starting a successful MOP making business requires a minimum of 1000 sq.ft area with a reliable electricity supply. This space should be well-ventilated and free from moisture to maintain the product’s quality. The production process involves assembling the MOP yarn onto the MOP clip attached to the MOP pipe, which is then packaged in covers. With a well-organized setup and skilled labour, the production process’s efficiency can increase to meet the market’s demand for the product.
The MOP making process requires the use of state-of-the-art machinery, with the high output MOP Making machine being the most crucial. This machine comes equipped with advanced technology, producing high-quality MOP heads that ensure efficiency and cost-effectiveness. Using Measurement scales will help to ensure accurate proportions of materials used for each MOP, saving labour and time, thus streamlining the production process. Investing in such a machinery increases productivity and ensures quality, resulting in high-quality products.
The target customers for the MOP making business are diverse but highly relevant to the venture’s success. Supermarkets, housekeeping agencies, and provisional stores represent the key customer segments that will drive the business’s growth and sustainability. These customers need MOPs for their day-to-day cleaning and maintenance routines. Supermarkets require MOPs to clean large spaces; provision stores need them for stocking items on high shelves, while housekeeping agencies use them for commercial cleaning. Besides these Hospitals, Universities, Hotels, Large Corporate Houses all need MOPs on a daily basis to clean their floors. By targeting these customers, the MOP making business can generate high-volume sales and build a reputation for quality and affordability. Understanding specific customer needs and preferences is essential to tailor products to meet their demands accurately. Customer satisfaction is a critical success factor for the MOP making business, and establishing long-term relationships with target customers is necessary to achieve growth and expansion.
To run a successful MOP Making Business, having the right personnel in place is vital. It is recommended to have one skilled worker and two unskilled workers for efficient machinery operations. The skilled worker will operate and maintain the machinery, while the unskilled workers will assist with tasks such as sorting finished products and packaging for shipment. Proper worker training is essential to ensure their effective performance, and a supervisor should be designated to oversee the production process and ensure quality standards are met. By hiring the right team, the MOP Making Business can operate effectively, deliver quality products, and satisfy customers. To ensure stable revenue streams while mitigating risks and expenses, choosing the right business model is critical. Targeting local suppliers and wholesale markets can increase revenue streams. Collaboration with office and house cleaning companies to offer quality MOPs at competitive prices can also create business opportunities. Selling products on e-commerce platforms like Amazon and Flipkart can help in expanding customer bases, increasing sales volume and revenue. With a well-planned business model and growth strategy, a MOP Making Business can thrive and succeed in a competitive marketplace.
The MOP Making Business is an attractive investment opportunity for entrepreneurs who seek a profitable venture with a vast market potential. Efficient utilization of resources and cost-effective production techniques can yield profit margins between 50% to 80%, a high return on investment for every Rupee invested. Such a robust margin is achievable by maintaining competitive pricing for customers while implementing sound financial management practices and a well-structured business strategy. Nonetheless, it is crucial to recognize that sustaining high-profit margins requires ongoing planning, monitoring, and evaluation of key performance indicators (KPIs).
The MOP making industry has a vast market potential, making it possible to expand the business by introducing other cleaning solutions. Including wiper and dry MOPs can be a smart move by providing efficient and effortless floor-cleaning options. Investing in modern technologies and equipment to produce quality products can improve the business’s reputation, attract and retain customers. The expansion of the business can result in increased revenues and improved market shares in the cleaning industry.
Advertising and networking with potential clients are essential strategies for growing the MOP Making Business. Promoting the business through advertisements can increase its visibility, reach a broader audience, and drive sales. Numerous advertising channels, including online advertisements, Instagram and Facebook ads, can be used based on the budget, target market, and specific goals. Networking with potential clients, joining local business organizations, and attending industry events is a way to establish valuable relationships with professionals, expand your client base, and learn more about the competition. Participating in Exhibitions relating to the clean & hygiene industry can always bring positive results.
Continuously monitoring and evaluating business metrics such as sales revenue, expenses, profit margins, customer retention rates, and production efficiency can drive informed decisions for growth and profitability. By tracking these KPIs, areas of strength and opportunities for improvement can be identified and utilized to forge a strategic approach to product offerings, production techniques, pricing strategies, and marketing efforts. Regularly monitoring and evaluating business metrics should be integrated into the business’s ongoing process to ensure continued growth and profitability.
To summarize, the MOP Making Business is lucrative and has steady domestic and international demand. By adopting modern production methods and using sustainable raw materials, entrepreneurs can build a successful business venture catering to the hygiene needs of millions of households worldwide. By implementing proper planning, marketing, and financial management practices in the business operations, entrepreneurs can tap into the growing market and establish a profitable business while providing effective cleaning solutions. The MOP Making Business, with a low investment and high returns potential, can offer a platform for aspiring entrepreneurs to crave out their success story.
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]]>Welcome to the land of diversity, India, where small businesses are the backbone of the economy. In recent years, entrepreneurship has taken off in India. With the country’s vast population and growing economy, small businesses have emerged as a vital component of the Indian market.
Understanding the Market in India:
With a population of over 1.3 billion, India offers a vast and diverse market for small businesses to thrive. Whether you are a local entrepreneur or a foreign investor, the opportunities are endless. However, before starting any business, conducting thorough market research and identifying a niche market is essential.
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Market research plays a crucial role in the success of any business, no matter how big or small. It helps you to understand market trends, consumer preferences, and competition. Identifying a niche market is equally important. A niche market is a specific market segment with unique needs and preferences. By targeting a niche market, you can create a more focused and personalized approach to your business, which can help you stand out from the competition.
If you’re considering starting a small business in India, here are 20 of the most successful small business ideas for beginners.
Food Delivery Service: In today’s fast-paced world, people are always on the lookout for convenient ways to get food. You can begin by partnering with local restaurants and offering delivery services for a fee. India is famous for its rich and diverse cuisine, and the food and beverage industry is booming. Small businesses can tap into this market by offering unique and traditional dishes, healthy and organic food options, and innovative packaging and delivery services.
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Online Tutoring: With the rise of e-learning, online tutoring has become a popular option for students across India. If you’re passionate about teaching, starting an online tutoring business could be an excellent way to leverage your skills.
Mobile App Development: Mobile apps are everywhere, and they’re not going away anytime soon. If you have a knack for programming, starting a mobile app development business could be a lucrative venture.
Social Media Management: Social media has become an integral part of many businesses marketing strategies. You can start a business offering social media management services if you are skilled in social media marketing.
Pet Care Services: Pet ownership is on the rise in India, and many pet owners are looking for reliable pet care services. Starting a pet care business can be a great way to tap into this market.
E-Commerce Store: With the growing trend of online shopping, starting an e-commerce store can be an excellent way to make money. Clothing and accessories, as well as electronics and home goods, are all acceptable items to sell.
Personalized Gift Shop: Everyone loves thoughtful gifts, and personalized gifts are even better. If you’re creative, starting a personalized gift shop can be a great way to capitalize on this market.
Yoga Studio: Yoga has become increasingly popular in India and worldwide. If you’re passionate about yoga and have experience teaching, starting a yoga studio can be a fulfilling and profitable venture.
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Cleaning Services: Cleaning services are always in demand. Starting a cleaning business can be an excellent way to generate consistent income.
Online Coaching: Coaching has become a popular profession in India, and online coaching is the next big thing. If you’re experienced in coaching and want to reach a wider audience, starting an online coaching business could be an excellent opportunity.
Digital Marketing Agency: With the prominence of digital marketing growing, establishing a digital marketing agency may be a successful business venture. You can offer a range of services, including SEO, PPC advertising, content marketing, and social media marketing.
Photography: Photography is a hobby for many, but it can also be a profitable business. If you have a talent for photography, starting a photography business can be an excellent way to make money doing something you love.
Event Planning: With the many events happening in India, event planning is a great business idea. You can offer a range of services, including planning, coordination, and execution.
Mobile Repair Services: With the prevalence of smartphones, mobile repair services are in high demand. Starting a mobile repair business could be an excellent opportunity if you’re skilled in repairing phones and other electronic devices.
Home Decor: Home decor is a growing industry in India. Starting a home decor business can be an excellent way to capitalize on this trend.
Online Marketplace: Online marketplaces like Amazon and Flipkart have become increasingly popular in India. According to Statista, the e-commerce market in India is projected to reach US$ 120 billion by 2025, making it a profitable market for online marketplaces.
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Content creation: As the demand for digital content continues to increase, you can start a business creating blog posts, videos, and social media content for companies.
Drop Shipping: A business model that involves selling products without keeping inventory. Manufacturers can work with you to sell their goods on your website.
Personal Chef: You can become a personal chef and offer cooking services for busy families or individuals. The market for personal chefs is growing in India, with an increasing number of households seeking out healthy and convenient meal options.
Personal Training: With the increased focus on health and fitness, there is a growing demand for personal trainers. You can start a business providing fitness training services.
Translation Services: With India being a diverse country with multiple languages, there is a growing demand for translation services.
Consulting: If you are knowledgeable in a certain area, you can provide consulting services to both businesses and private clients. The consulting industry in India is projected to grow at a CAGR of 9.2% during 2021-2026, according to ResearchAndMarkets.
Small businesses in India have a vast and diverse market to explore, but it’s crucial to conduct thorough market research and identify a niche market to succeed. With the right strategy and approach, the opportunities are endless. So, what are you waiting for? Take the first step towards starting your small business in India today!
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]]>वास्तव में कूलिंग पैड कूलिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्योकि सबसे पहले, गर्म हवा को कूलिंग पैड से गुजारा जाता है। फिर कूलिंग पैड जो ठंडे पानी को अवशोषित कर लेते हैं, और ठंडी हवा में स्थानांतरित कर देते हैं। कूलिंग पैड से निकलने वाली ठंडी हवा तुरंत पंखे की मदद से बाहर फैल जाती है। नये हनीकॉम्ब कूलिंग पैड सेलूलोज़ सामग्री से बनाये जाते हैं। यह मधुकोश या मधुमख्खी के छत्ता जैसा दिखता है इसलिए इसे मधुकोश शीतलन पैड कहा जाता है। ये पैड ठंडा करने में बहुत प्रभावी होते हैं और इन्हें कम रखरखाव या सफाई की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, हनीकॉम्ब कूलिंग पैड अन्य पारंपरिक कूलिंग पैड जो खस खस से या लकडी के छीलन से बनाये जाते है उनकी तुलना में बहुत टिकाऊ होते हैं। इन कारणों से, अधिकांश हाई-एंड एयर कूलर हनीकॉम्ब कूलिंग पैड का उपयोग करते हैं। अभी मार्केट में आने वाले सभी डेजर्ट एयर कूलर बड़े पैमाने पर कुशलतापूर्वक हवा को ठंडा करने की क्षमता को बडाने के लिए हनीकॉम्ब कूलिंग पैड का उपयोग करते हैं। हालांकि ये थोड़े महंगे होते हैं और इसीलिए इनका इस्तेमाल मंहगे डेजर्ट कूलर में ही किया जाता है न कि सस्ते पर्सनल एयर कूलर में। मधुकोश शीतलन पैड सभी प्रकार के एयर कूलर जैसे व्यक्तिगत एयर कूलर और डेजर्ट एयर कूलर में उपलब्ध हैं।
हनीकॉम्ब कूलिंग पैड कागज के मोटे सेलूलोज़ पेपर से बने होते हैं और एयर कूलिंग के लिए बहुत प्रभावी माने जाते हैं। मधुकोश कूलिंग पैड की सामग्री को विशेष रूप से वर्षों तक खराब होने से बचाने के लिए एक रसायन के साथ उपचारित किया जाता है। हालांकि ये पारंपरिक उपयोग की जाने वाली सामान्य पारंपरिक घास व लकडी की घास की तुलना में महंगे हैं, मधुकोश पैड को बहुत कम रखरखाव और सफाई की आवश्यकता होती है। यह उन्हें लंबे समय में तक चलने से इनकी लागत कम होती है है। लकडी की घास की तरह उन्हें हर साल बदलने की जरूरत नहीं है।
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इसका लंबा चलना और रखरखाव हनीकॉम्ब कूलिंग पैड वाले एयर कूलर को कम रखरखाव की आवश्यकता होती है और ये अधिक टिकाऊ भी होते हैं। सेल्युलोज सामग्री से बने, हनीकॉम्ब कूलिंग पैड गर्म हवा को ठंडा करने में बेहद प्रभावी होते हैं और उच्च श्रेणी के मंहगे डेजर्ट कूलर में उपयोग किए जाते हैं। सेल्युलोज की पर्त इसके अधिक समय तक चलते रहने के लिये और लंबे समय तक चलने के साथ-साथ विशेष गंधहीन चिपकने वाले के पदार्थ का उपयोग किया जाता है।
तथ्य यह है कि अन्य कूलिंग पैड्स को लगातार सफाई और समय के साथ बदलने की आवश्यकता होती है, जैसे कि जो लंबे समय से प्रचलन में है वुड वूल कूलिंग पैड, ये पैड कम प्रभावी होते हैं। जबकि, हनीकॉम्ब कूलिंग पैड वाले कूलर कुशलता से काम करते हैं और गर्मियों के दौरान एक अच्छा समाधान देते हैं।
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मधुकोश कूलिंग पैड कम हवा की मात्रा के साथ उच्च शीतलन की प्रदान करते हैं, मधुकोश पैड में 80% से अधिक दक्षता के साथ ठंडी हवा प्राप्त होती है। मधुकोश पैड की ये विशेष रूप से तैयार मधुकोश की फ़्लूटेड संरचनाएं सैगिंग और क्लॉगिंग देती हैं जिससे लंबी अवधि के लिए ठंडी हवा मिलती है। ये पैड अधिकतम शीतलन क्षमता देने के लिए पानी को अवशोषित करने और बनाए रखने में सक्षम हैं।
वैश्विक स्तर पर, हनीकॉम्ब कूलिंग पैड वाले एयर कूलर का बाजार आकार वर्ष 2018 में 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर आंका गया था और वर्ष 2019 से 2025 तक 10.8% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ने की उम्मीद है। बाजार की वृद्धि का श्रेय इसको बनाने वालो को दिया जाता है और कुशल शीतलन, एसी की तुलना में कम बिजली की खपत, बाहरी स्थान में उपयोग और उत्पाद में नवीनता यह इसके उपयोग बडने के कारण है।
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Niir Project Consultancy Services (NPCS) की प्रोजेक्ट रिपोर्ट आपको उद्योग के आकार, उत्पाद की बाज़ार क्षमता और उत्पाद में निवेश करने के कारणों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर प्रकाश डालकर निवेश या विविधता लाने के लिए एक लाभदायक परियोजना की पहचान करने में मदद करती है। रिपोर्ट में व्यवसाय के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है, बाजार का विश्लेषण करने से लेकर, विभिन्न आवश्यकताओं जैसे संयंत्र और मशीनरी, कच्चे माल की उपलब्धता की पुष्टि करने से लेकर वित्तीय आवश्यकताओं की भविष्यवाणी करने तक। एनपीसीएस जानकारी और डेटाबेस के विश्वसनीय स्रोतों का उपयोग करता है। और ऐसे स्रोतों से प्राप्त जानकारी को विशेषज्ञों द्वारा प्रोसेस किया जाता है और रिपोर्ट में शामिल किया जाता है। शोध रिपोर्ट मोटे तौर पर भारतीय बाजारों, वर्तमान विश्लेषण, दृष्टिकोण और पांच साल की अवधि के लिए पूर्वानुमान को कवर करती है।
A honeycomb pad is a type of cooling pad used in evaporative air coolers. It is made up of a series of interconnected tubes or channels that form a honeycomb-like structure. The pad is typically made from cellulose material, which is highly absorbent and can hold a large amount of water.
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When the air cooler is in operation, a pump circulates water over the honeycomb pad, wetting it thoroughly. As air is drawn through the pad, the water evaporates, absorbing heat and cooling the air. The cooled air is then blown out of the air cooler and into the room.
Honeycomb pads are effective at cooling air quickly and efficiently, and are relatively low cost and easy to maintain. They are commonly used in portable air coolers and in large commercial cooling systems. However, they do require regular cleaning and replacement to ensure optimal performance.
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Why to Start the Business of Honeycomb Cooling Pads?
The cooling pads play a vital role in cooling. First, the hot air is passed through the cooling pads. Then the cooling pads which have absorbed the cool water transfer the cooling to the air. The cool air that comes out from the cooling pads immediately circulates outside with the help of a fan. The honeycomb cooling pads are made of cellulose materials. It looks like a honeycomb hence is preferred as honeycomb cooling pads. These pads are very effective in cooling and need less maintenance or cleaning. Besides, the honeycomb cooling pads are very durable as compared to the other cooling pads. Due to these reasons, most high-end air coolers use honeycomb cooling pads. Generally, the desert air coolers use honeycomb cooling pads for their efficiency of cooling the air at a large scale efficiently. Although these are a bit expensive and that is why these are used only in high-end desert coolers and not in the low-end personal air coolers. The honeycomb cooling pads are available in all types of air coolers such as personal air coolers and desert air coolers.
The honeycomb cooling pads are made up of well-engineered thick cellulose paper and are known to be very effective for air cooling. The material of honeycomb cooling pads is specially treated with a chemical to resist deterioration for years. Although these are expensive than the normal traditional grass that is used for ages, the honeycomb pads need very little maintenance and cleaning. This makes them cost-effective in the long run. There is no need to change them every year like the aspen grass.
The air coolers with honeycomb cooling pads need fewer maintenances and are also more durable. Made up of cellulose material, the honeycomb cooling pads are extremely effective in cooling down the hot air and are used in high-end desert coolers. The cellulose media is treated with stiffening and not-resisting agents as well as specialized odorless adhesives to increase its useful life and durability.
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Efficiency
The fact that the other cooling pads need constant cleaning and changing over time such as the wood wool cooling pads, these pads are less effective. Whereas, coolers that have honeycomb cooling pads operate efficiently and give an attractive solution during the summers.
Energy Efficient
The honeycomb cooling pads allow higher cooling with lower air volume, honeycomb pads have saturation effectiveness with over 80% efficiency. These specially engineered honeycomb fluted structures of honeycomb pads give sagging and clogging hence delivering cool air for a longer period of time. These pads are capable of absorbing and retaining water to give maximum cooling efficiencies.
Globally, the market size of air coolers with honeycomb cooling pads was valued at USD 1.2 billion in the year 2018 and is anticipated to increase at a compound annual growth rate of 10.8% from the year 2019 to 2025. The market growth is credited to affordability and efficient cooling, less power consumption as compared to AC, the usage in outdoor space, and product innovation.
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The project report by Niir Project Consultancy Services (NPCS) helps you to identify a profitable project for investing or diversifying by throwing light on crucial areas like industry size, the market potential of the product, and reasons for investing in the product. The report covers all the aspects of business, from analyzing the market, confirming availability of various necessities such as plant & machinery, raw materials to forecasting the financial requirements. NPCS use reliable sources of information and databases. And information from such sources is processed by the experts and included in the report. The research reports broadly cover Indian markets, present analysis, outlook, and forecast for a period of five years.
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]]>चंदन की खेती (Sandalwood Cultivation)
चन्दन का पौधा बहुत ही खुशबूदार पौधा होता है | हमारे देश में चन्दन की लगभग 20 प्रकार की प्रजातियां पाई जाती हैं। चंदन का प्रयोग धार्मिक कार्यों के अलावा, औषधियों को बनानें, परफ्यूम या इत्र बनानें, बच्चों के खिलौने बनानें, हवन सामग्री बनाने आदि के अलावा और भी कई प्रकार की चीजें बनानें में चन्दन का उपयोग किया जाता है| हमारे देश में चन्दन की खेती सबसे अधिक महाराष्ट्र,गुजरात, मध्यप्रदेश (MP) और राजस्थान में होती है| आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चन्दन की खेती के लिए बेहतर मिट्टी, पानी और उचित तापमान की आवश्यकता होती है| चन्दन की खेती कर आप करोड़ों की कमाई कर सकते हैं। हालाँकि चन्दन की खेती करनें के लिए आपको फारेस्ट डिपार्टमेंट से लाइसेंस प्राप्त करना पड़ता है |
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तुलसी की खेती (Basil cultivation)
तुलसी एक औषधीय और यह बहत ही लाभकारी पौधा होता है | आमतौर पर तुलसी के पौधे की ऊंचाई 30 से 60 सेमी तक होती है | तुलसी की खेती कर आप करोड़ो रुपये की आमदनी कर सकते है| इसके लिए कटिबंधीय (Tropical) और उष्णकटिबंधीय दोनों ही तरह की जलवायु उपयुक्त होती है| यह एक ऐसा पौधा होता है, जिसकी फसल कभी ख़राब नही होती है लेकिन इसकी देखभाल करना जरूरी होता है |
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मशरूम की खेती (Mushroom Cultivation)
वर्तमान समय में मशरूम की डिमांड काफी अधिक है और लगातार इसकी मांग बढती जा रही है | मशरूम एक ऐसी फसल है, जिसकी लगत से 6 गुना कमाई कर सकते है | मार्केट में जितनी इसकी डिमांड है, उस हिसाब से इसका उत्पादन नही हो रह है| जिसके कारण इसके दामों में भारी बढ़ोत्तरी देखनें को मिलती है|
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मशरूम की खेती से आप करोड़पति बन सकते है | हालाँकि खेती करनें के लिए आपको विशेष प्रकार की ट्रेनिंग की आवश्यकता होती है |
वनीला की खेती (Vanilla cultivation)
वनीला को मुख्य रूप से एल्कोहल, मिठाई बनानें, आइसक्रीम और परफ्यूम आदि अनेक प्रकार की चीजों को बनानें में उपयोग किया जाता है| मार्केट में इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है और भविष्य में इसकी मांग बढ़ने की संभावनाएं काफी अधिक है| वनीला की खेतीकर आप काफी अच्छी कमाई कर सकते है |
ईसबगोल की खेती (Isabgol Cultivation)
भारत में ईसबगोल की खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात,हरियाणा और पंजाब में की जाती है | इसका पौधा एक औषधीय पौधा होता है| इसकी खेती कर आप लाखों की कमाई कर सकते है| इसकी खेती करनें के लिए सरकार की तरफ से सब्सिडी भी दी जाती है। इसकी भूसी में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं और यह हमारे पाचनतंत्र के लिए बहुत ही लाभकारी माना जाता है |
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एलोवेरा की खेती (Aloe cultivation)
वर्तमान समय में एलोवेरा का इस्तेमाल सबसे अधिक सौन्दर्य प्रसाधन करने वाली चीजो के निर्माण में किया जाता है | इसके अलावा इसका इस्तेमाल दवा के रूप में भी किया जाता है | मार्केट में एलोवेरा की डिमांड काफी अधिक है| इसकी खेती करके आप अच्छी आमदनी कर सकते है| यहाँ तक कि आने वाले समय में इसकी डिमांड बढ़ने की संभावनाएं काफी अधिक है | एलोवेरा की खेती के लिएरेतीली मिट्टीबहुत उपयुक्त मानी जाती है| भारत में एलोवेरा की कई प्रजातियाँ पाई जाती है, यहाँ तक कि आमतौर पर इसे घरों में देखा जा सकता है|
अफीम की खेती (Opium cultivation)
भारत में अफीम की खेती गैरकानूनी है और इसकी खेती करनें के लिए सरकार से लाइसेंस प्राप्त करना होता है | अफीम की खेती एक ऐसी खेती है, जिसमें मुनाफा सबसे अधिक मिलता है|
इसकी खेती करनें आप बहुत ही कम समय में करोड़पति बन सकते है| अफीम की खेती के लिए अक्टूबर और नवंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है |
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अश्वगंधा की खेती (Ashwagandha cultivation)
अश्वगंधा की खेती करके आप अच्छी खासी आमदनी प्राप्त कर सकते है | अश्वगंधा की खेती मुख्य रूप से सितंबर और अक्टूबर के महीने में की जाती है| भारत में अश्वगंधा की खेती सबसे अधिक बिहार और उत्तर प्रदेश में की जाती है|
अश्वगंधा के फल के बीज और छाल से अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाईयां बनायीं जाती है| मार्केट में इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है| अश्वगंधा के बीज के अनुकरण में लगभग 7 से 8 दिन का समय लगता है | अश्वगंधा की फसल की कटाई जनवरी से लेकर मार्च तक की जाती है |
सफेद मुसली की खेती करनें में परिश्रम की आवश्यकता सबसे अधिक होती है | हालाँकि इसकी खेती से आमदनीं भी बहुत अच्छी होती है| सफेद मुसली एक यूनानी और आयुर्वेदिक दवा है| इसके फल को भूमि के अन्दर उगाया जाता है और जमीन के ऊपर निकलने वाले फूलों से बीज बनाकर मार्केट में बेचा जाता है| मार्केट में सफेद मुसली की डिमांड बहुत अधिक है| सफेद मुसली से खांसी, पीलिया, अस्थमा,बवासीर और चर्म रोगइत्यादि की दवा बनायीं जाती है | इसकी खेती के लिए काली चिकनी मिट्टी को उपयुक्त माना जाता है |
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दुनिया के लगभग सभी देशों में मसालों की मांग काफी अधिक है | इसके बावजूद इनका उत्पादन सिर्फ गिने चुने देशों में ही होता है| यदि आप एक किसान है, और आपके पास खेती करनें के लिए उपयुक्त जमीन है, तो मसालों की खेती कर कुछ ही समय में करोड़पति बन सकते है| हलाकि इसकी खेती करनें से पहले आपको इसके उत्पादन से सम्बंधित (मिट्टी, खाद, पानी ) आदि के बारें में पूरी जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए| खासकर मसालों में धनिया, काली मिर्च, मेथी, जीरा, हल्दी, अदरक और इलायची आदि आते है|
सागवान की खेती (Sagwan’s Farming)
मजबूती के मामले में सागवान की लकड़ी को बहुत ही अच्छा माना जाता है | इसकी लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से आलीशान बंगले, फर्नीचर और जहाजों के निर्माण इत्यादि महत्वपूर्ण कार्यों में किया जाता है | मार्केट में सागवान के 12 से 15 माह के तैयार पौधा लगभग 200 रुपये तक मिल जाता है| आप 1 एकड़ में सागवान के 500 से 600 पौधे आठ से दस फुट की दूरी पर बड़ी आसानी से लगा सकते है| इसके साथ ही इन पौधौ के बीच बचने वाली जगह में अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों का उत्पादन कर सकते है | सागवान का एक पेड़ लगभग 13 से 15 वर्ष में तैयार हो जाता है | इसके मुख्य तने की लम्बाई लगभग 35 से 40 फुट तक होती है | जिसका मार्केट में मूल्य लगभग 3 हजार रुपये प्रति घन फुट होता है |
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यदि आप खेती से करोड़पति बनना चाहते है, तो फूलों की खेती आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है | फूलों की ऐसी कई प्रजातियाँ है, जिनकी भारत में ही नही बल्कि विदेशों में भी बहुत अधिक मांग है | दरअसल फूल दिखनें में जितने आकर्षक और सुन्दर होते है, उतने ही इसमें औषधीय गुण पाए जाते है| फूलों से विभिन्न प्रकार औषधियां बनायीं जाती है, इसके अलावा फूलों से सौन्दर्य प्रसाधन (Cosmetics) की चीजे और परफ्यूम (Perfume) भी बनाया जाता है | फूलों के खेती के अंतर्गत आप ग्लाईडोलियस (Gladolius), गेंदा, ड़ेंजी, गुलाब और सूरजमुखी आदि की खेती कर सकते है | फूलों की खेती में सबसे खास बात यह है, कि आप इनकी 1 वर्ष में 3 बार फसले ले सकते है |
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केसर की खेती (Kesar Farming)
केसर एक बहुत ही खुश्बुदार पौधा होता है और इसे लाल सोना भी कहते है | केसर की खेती आपको बहुत ही कम समय में करोड़पति बना सकती है| हालाँकि इसकी खेती करना काफी कठिन होता है क्योंकि इसकी बुवाई से लेकर इसके फूलों को एकत्र करने तक का समस्त कार्य आपको हाथों से ही करना पड़ता है|
केसर की खेती के लिए समुद्र तल से 1500 से 2500 मीटर ऊंचाई का क्षेत्र सबसे उपयुक्त माना जाता है| केसर की खेती 2 से 3 महीनों में तैयार हो जाती है और मार्केट में बहुत ही ऊँचे दामों में बिकता है|
इलायची का उपयोग चाय बनानें से लेकर अनेक प्रकार की औषधियां बनानें में किया जाता है | इलायची को मसालों की रानी भी कहते है | इलायची का पौधा तैयार होनें में लगभग 3 वर्ष का समय लगता है और पूरी तरह से तैयार हो जाने पर यह 25 से 30 वर्ष तक कमाई देता है| इसकी खेती के लिये उष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे अधिक उपयुक्त मानी जाती है| जहाँ गर्मियों के मौसम में कम से कम 10 डिग्री सेंटीग्रेड और सर्दियों में 35 डिग्री सेन्टीग्रेड टेम्प्रेचर की आवश्यकता होती है|
इलायची के पौधे की ऊंचाई लगभग 5 से 7 फीट तक होती है और 1 एकड़ में लगभग 150 से लेकर 170 किलोग्राम तक का उत्पादन होता है | मुख्य रूप से इलायची की छोटी और बड़ी 2 किस्में होती है, जो मार्केट में 2 से 5 हजार रुपये प्रति किलों के हिसाब से बेंची जाती है |
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किन्नू का फल हल्का खट्टा और बुत ही स्वादिष्ट होता है, जो देखने में सुनहरे संतरी रंग का होता है | यह एक नीबू प्रजाति का फल है, जिसकी खेती से आप कुछ ही समय में करोड़पति बन सकते है | दरअसल यह यह केले और आम के बाद तीसरा सबसे अधिक बिक्री वाला फल है | आप इसे 1 एकड़ में लगभग 200 से 250 पौधे लगा सकते है|
इसकी खेती में सबसे बड़ा लाभ यह है, जब तक इसके पौधे बड़े नही हो जाते तब तक इनके बीच में अन्य फसलों का उत्पादन कर सकते है | इसकी खेती के लिए चिकनी और रेतीली दोमद मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है |भारत में किन्नू का उत्पादन सबसे अधिक पंजाब में किया जाता है |
जब कभी महगाई का जिक्र होता है, तो प्याज का नाम सबसे पहले लिया जाता है | प्याज एक ऐसी चीज है, जिसके उपयोग सभी प्रकार की सब्जियों को बनानें के अलावा सलाद के रूप में भी किया जाता है | हालाँकि जब प्याज की पैदावार होती है, तो बाजार में इसका भाव काफी कम होता है | लेकिन पूरे साल में एक बार ऐसा समय आता है, जब इसका भाव 70 से 100 रुपये के करीब पहुँच जाता है | इसके लिए आपको 2 से 3 महीन का इन्तजार करना होता है और तब तक इसे कोल्ड स्टोर में रखना होता है और उचित भाव होनें पर इसे बेंच दिया जाता है|
यदि हम इसके उत्पादन की बात करे, तो 1 बीघे में लगभग 50 कुंतल तक पैदावार होती है | इस हिसाब से यदि आप 10 बीघा खेत में इसका उत्पादन करते है, तो एक सीजन में लगभग 500 कुंतल का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है | इस प्रकार आप प्याज की खेती कर 5 से 6 वर्षो में करोड़पति बन सकते है |
बताई गई फसलों की खेती करके हम अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते है, और अभी अन्य ऐसी फसलें जैसे – हॉप सूट्स की खेती या फिर बताई गई फसलें जो समय पर अच्छा मूल्य प्रदान करती है, इनके माध्यम से अमीर (करोड़पति) खेती करके बन सकते है |
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]]><p>The post Papad Making Business Ideas In Hindi, How to Start a Papad Making Business? पापड़ बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? first appeared on Anju Jadon News & Blogs.</p>
]]>दोस्तो आज का हमारा विषय है पापड़ बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें अर्थात how to start papad making business in hindi in hindi। यह व्यापार खास करके महिलाओं के लिए है जो घर पर अपने कार्य करने के बाद बैठी रहती है। यह एक तरह का housewife business भी कहा जा सकता है। papad making machine for small business in hindi इसके बारे में भी मैं आपको पूरी जानकारी दूंगी ताकि आप अपने घर के कार्य के साथ या व्यापार शुरू कर सकें। पापड़ बनाने का बिजनेस कैसे शुरू करें? (इसमें सभी कुछ है जैसे कुल लागत, मशीन की कीमत, बनाने की विधि, मुनाफा, मार्केटिंग)। How to Start a Papad Making Business?
पापड़ का प्रयोग प्रत्येक दिन ना सिर्फ हमारे घरों में, बल्कि होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट में भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किए जाते हैं। इसके साथ ही पापड़ का उपयोग स्नेक्स, चार्ट इत्यादि में भी किया जाता है। पापड़ बच्चे से लेकर बूढ़े तक सभी को पसंद आती है, और दूसरी इसकी खासियत यह है कि हमारे खाना को पचाने में मदद करता है। इसलिए भी इसकी सर्वाधिक उपयोग किया जाता है।
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पापड़ का अत्यधिक का फ्लेवर जैसे मसाला पापड़, प्लेन पापड़, फ्राई पापड़ इत्यादि होने के कारण भी यह अपने आप में एक लोकप्रिय डिश है। अगर आप कम से कम पूंजी में अपना बिजनेस यानी कि व्यापार की शुरुआत करना चाहते हैं। तो यह आपके लिए बहुत ही फायदेमंद साबित हो सकता है। पापड़ बनाने का बिजेनस में महिलाएं बहुत ज्यादा कुशल होती है इसलिए इस बिजनेस को महिला गृह उद्योग भी कहा जाता है। आप भी ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इस उद्योग में लगाकर ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं।
पापड़ बनाने का बिजनेस आप बिना मशीन का भी शुरुआत कर सकते हो। इसलिए इसमें बहुत ही कम पूंजी से आप इस बिजनेस की शुरुआत कर सकते हैं। तो चलिए इस पोस्ट में हम डिटेल से जानते हैं कि इस बिजनेस में कुल कितने खर्च आएंगे? कितने प्रॉफिट होगी? एवं इसे बेचने के लिए मार्केट मे क्या करना पड़ेगा? इसके लिए क्या किसी खास प्रशिक्षण लेने की जरूरत पड़ती है? या कितनी जगह की जरूरत आएगी? सारी चीज डिटेल में समझते हैं।
पापड़ उद्योग को इसलिए करना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में पापड़ की बहुत ही ज्यादा मांग बाजारो में क्योंकि आज का ऐसा फैशन बन चुका है कि लोग दाल चावल के साथ पापड़ को खाना पसंद करते हैं एवं कुछ लोग ऐसे ही अचार पापड़ खाते हैं। कई शादी विवाह एवं अनु फंक्शन में भी पापड़ को बनाया जाता है इसलिए पापड़ की मांग बहुत ही ज्यादा है।
इस व्यापार को करने के लिए आपको इसमें अत्यधिक निवेश करने की आवश्यकता नहीं है आप इस बिजनेस को छोटे स्तर पर भी शुरू कर सकते हैं यद्यपि इस बिजनेस को कोई महिला शुरू करना चाहती है तो वह अपने घर से इसकी शुरुआत बहुत ही आसानी से कर सकती है।
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यह एक ऐसा व्यवसाय हैं जिसे आप अपने घर से ही शुरू कर सकते हैं. इसके लिए कम से कम 100 स्क्वायर फीट स्थान की आवश्यकता होती हैं. किन्तु यदि आपके घर में इतनी जगह नहीं है, तो आप एक कमरा किराये पर लेकर भी इस व्यवसाय को कर सकते हैं. इतनी जगह की आवश्यकता आपको इसलिए पडती हैं ताकि आप पापड़ बनाने के बाद उसे फैलाकर अच्छे से सूखा सकें.
पापड़ बनाने का बिजेनस में आपको पापड़ बनाने एवं सुखाने तथा उसको स्टोर करने की पर्याप्त जगह होनी चाहिए। लेकिन जैसे ही आपका व्यापार फलने फूलने लगता है तो आप को बड़े से जगह में जैसे कि 200 – 500 स्क्वायर फीट के जगह में आपको अपने बिजनेस को शिफ्ट कर लेना चाहिए। जिससे कि आप अच्छी तरह से बिना कोई डिस्टर्ब हुए आप अपने व्यापार को आगे बढ़ा सकते हो।
पापड़ बनाने का बिजनेस आप दो तरीका से शुरू कर सकते हैं, एक मशीन के साथ और दूसरा बिना मशीन के साथ।
अगर आप पापड़ बनाने की बिजनेस बिना मशीन के शुरुआत करना चाहते हैं। तो शुरुआत में आपको सिर्फ कच्ची सामग्री एवं फर्नीचर जैसे कि टेबल, कुर्सी और बेलन चौकला आदि खरीदना पड़ेगा। जिसमें कि आप आराम से ₹10000 तक में आप शुरुआत कर सकते हैं।
अगर आप मशीन लगाने की सोच रहे हैं, तो इसमें विभिन्न प्रकार की मशीन आती है। जो कि आपको लगानी पड़ेगी जिसका अभी मार्केट में रेट 10000 से ₹100000 तक की आएगी।
Papad Making Business Ideas In Hindi, How to Start a Papad Making Business – वर्तमान समय में लोगों को कई तरह के पापड़ पसंद है जैसे चावल मैदा दाल साबूदाना इत्यादि। लेकिन इन सब में सबसे ज्यादा लोगों को उड़द की दाल का पापड़ पसंद आता है क्योंकि इसी कच्चे माल का इस्तेमाल करके औद्योगिक तौर पर पापड़ का व्यापार किया जाता है इसके अलावा कुछ और भी सामान है जिन की आवश्यकता लगती है जैसे..
यह सभी पापड़ उद्योग के कच्चे माल है।
पापड़ बनाने के लिए सबसे पहले आपको दाल के आटा जिसमें नमक, मिर्च और अलग-अलग प्रकार के मसाले एवं रिफाइंड तेल, कास्टिक सोडा मिलाकर इसे अच्छे से लोई बनाते हैं।
फिर इसको रोटी के जैसे बेल देते हैं। एवं ड्रायर मशीन में या हवा में से सुखाते हैं। सुखाते समय का ध्यान रखें कि पापड़ को धूप में नहीं सूखाना चाहिए, नहीं तो इसकी स्वाद खराब हो जाती है।
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फिर इसे पैक कर मार्केट में बेचने के लिए रेडी कर देते हैं।
क्योंकि पापा अलग-अलग बनावट एवं नाम जैसे कि मिनी पापड़, बड़े पापड़, भुने पापड़, खाखरा पापड़ इत्यादि के रूप में मार्केट में उपलब्ध होती है एवं बिकती है।
इसलिए पापड़ बनाने का बिजेनस में बहुत ही ज्यादा उन्नति के रास्ते उपलब्ध है, और इसमें मार्जिन भी बहुत अच्छी आती है सीधी सीधी शब्दों में आपको बताया जाए तो आप अगर 1kg पापड़ का सेल कर लेते हैं तो आप 100 से 150 रुपए की मुनाफा कमा सकते हैं।
पापड़ की अलग-अलग वैरायटी होने के कारण आप शुरुआती दिनों से ही आराम से 10Kg से 20 Kg पापड़ सेल कर पाओगे, और आप रोज के ₹1500 से ₹3000 मुनाफा कमा पाओगे।
इस व्यापार को करने के लिए मशीनों की बहुत अवश्यकता होती है लेकिन ऐसा भी नहीं कहा जा सकता की बिना मशीन के पापड़ नहीं बनेंगे। लेकिन अगर इन मशीनों का इस्तेमाल करेंगे तो आप को इस उद्योग को करने में और भी आसानी होगी। मैं इन मशीनों का नाम आप को बताते है कम से कम मशीन जो लगेगी वो नीचे बता रहे है
मुख्यता इतनी मशीनों की आवश्यकता पड़ती है पापड़ उद्योग करने के लिए। यदि आप कम निवेश में इस व्यापार को शुरू करना चाहते हैं तो आप इसमें से कई तरह की मशीनें मत लीजिए आप उसके लिए खुद के हाथ का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
पापड़ बनाने का बिजेनस मे आपको दो तरह के मशीन मार्केट में मिलेंगे।
एक मैन्युअल मशीन या छोटी मशीन एंव ऑटोमेटिक मशीन दोनों अलग-अलग दामों में है, तो आप अपने बजट के हिसाब से किसी एक मशीन का चयन कर सकते हैं।
पापड़ बनाने का बिजेनस का शुरुआत करने के लिए कच्ची सामग्री।
इस बिजनेस की शुरुआत करने के लिए आपको निम्नलिखित कच्ची सामग्री की जरूरत पड़ेगी।
मेनुअल पापड़ बनाने वाली मशीनों की कीमत अधिक नहीं है। पापड़ को आकार देने वाली हाथ की मशीन की कीमत आपको लगभग 550 रुपए में मिल जाएगी। एवं पापड़ बनाने के लिए अन्य मशीन इनकी भी कीमत अत्यधिक नहीं है ग्राइंडर मशीन एवं एक्शन मशीन यह सब आपको लगभग 2000 से ₹3000 तक मिल जाएंगे। इसलिए यह व्यापार बहुत सारे उद्यमी करते हैं क्योंकि इसमें निवेश कम और मुनाफे ज्यादा होते हैं।
बहुत सारे लोग जो घर पर पापड़ उद्योग शुरू करते हैं वह सब इन मशीनों का इस्तेमाल नहीं करते वह पापड़ बनाने के लिए हाथ से उसे रोटी के जैसे बेलते हैं। एवं सुखाने के लिए धूप का इस्तेमाल करते हैं। यद्यपि आप चाहे तो आप भी इसी तरह कर सकते हैं लेकिन अगर आप बड़े स्तर पर अपने व्यापार को शुरू करना चाहते हैं तो आपको उसके लिए मशीनों की आवश्यकता पड़ेगी।
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ऊपर की सभी बातें जान लेने के बाद आपको यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि किस तरह से पापड़ बनाए जाते हैं। क्योंकि इस व्यापार में सबसे महत्वपूर्ण कार्य पापड़ बनाना ही होता है इसलिए यदि इस कार्य में थोड़ी सी भी गलती हो जाए तो आपका पूरा व्यापार नष्ट हो सकता है और आपको इसमें नुकसान हो सकते हैं। मैं आपको पापड़ बनाने का तरीका बताता हूं।
पकड़ बनाने का तरीका बहुत ही आसान होता है।
किसी भी प्रोडक्ट को आप शुरू करते हैं, तो शुरुआत में आपको अच्छी खासी ध्यान अपने पैकेजिंग पर भी देनी पड़ती है। क्योंकि शुरुआत में आपको अपने पैकेजिंग पर लोगों, अपना एड्रेस, अच्छे से छपवा कर उसे अच्छा से बनाना पड़ता है। जिससे कि लोगों की ध्यान उस पर आये और वह आपके ब्रांड की ओर आकर्षित हो पाए।
इसलिए आपको भी अपने पैकेजिंग के तरफ अच्छे से ध्यान देना चाहिए, और अपना एक ब्रांड लोगो बनाकर अपने पैकेट के ऊपर उसे छपवा तथा अपना एड्रेस भी ऊपर जरूर लिखवा लेनी चाहिए, और उसे अट्रैक्टिव बनाने की कोशिश करें।
पापड़ बनाने का बिजेनस में आपको सबसे पहले फूड लाइसेंस जो कि भारत सरकार के एफएसएसएआई (fssai.gov.in) के द्वारा निर्गत किया जाता है। वहां ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
इसके बाद जब आपका बिजनेस बढ़ जाए तो आप अपने ब्रांड का रजिस्ट्रेशन करा सकते हो।
इसके साथ ही आपको कंपनी का बिजनेस अकाउंट एवं पैन कार्ड इत्यादि बनवा लेना चाहिए।
जब भी कोई व्यक्ति को पापड़ खरीद नहीं होती है तो वह नजदीकी किराना स्टोर में जाता है। इसलिए आपको भी अपने पापड़ बेचने के लिए नजदीकी किराना स्टोर एवं उसके हौलसेलर के पास जाकर अपने सैंपल दिखा कर उनके द्वारा ज्यादा सेल करने की कोशिश करनी होगी।
इसके लिए आप चाहो तो उस दुकानदार को ज्यादा मार्जिन या फिर अलग तरह से गिफ्ट देकर उन्हें मना सकते हो।
इन सबके अलावा आपको अपने ब्रांड का प्रचार प्रसार भी जरूर करना चाहिए। जिससे लोगों तक आपकी पहचान बने और लोग आपकी ब्रांड का डिमांड मार्केट में करें।
आप अपने ब्रांड का प्रचार प्रसार टेंप्लेट, पोस्टर छपवा कर या सोशल मीडिया के माध्यम से भी करवा सकते हो।
जैसा कि दूसरे बिजनेस के शुरुआत में भी होती है, शुरुआत में आपको कोई नहीं जानता और पहचानता है ना ही आपके प्रोडक्ट के बारे में लोगों को पता होता है। इसलिए आप शुरुआत में कम मार्जिन में बेचने का प्रयास करें और शुरुआती दिनों को आप कम से कम प्रॉफिट के तरफ ध्यान दें। एवं इसे अच्छे से प्रचार प्रसार करें, तथा अपने प्रोडक्ट की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान दें, तो आप बहुत ही जल्द अपने बिजनेस को सफल बना लोगे। और आप आराम से महीने के 50,000 से ₹100000 कमा सकते हो।
छोटी मशीन की कीमत आपको आराम से 10 से ₹12000 में मार्केट में मिल जाएगी।
पापड़ बनाने की मशीन की कीमत आपको मार्केट में 10,000 से लेकर ₹100000 तक में अभी उपलब्ध है।
पापड़ बहुत सारी फ्लेवर में बनाई जाती है, जैसे पंजाबी मसाला, उड़द दाल पापड़, मूंग दाल पापड़, हिंग पापड़, काली मिर्च पापड़, हरी मिर्च पापड़, लाल मिर्च पापड़, जीरा पापड़, लहसुन पापड़, अदरक पापड़, इलायची पापड़, लॉन्ग पापड़, दाल चीनी पापड़, साबूदाना पापड़, तिलपापड़, बाजरा पापड़, इत्यादि।
Ans : जी हाँ पापड़ की मांग मार्किट में बहुत अधिक होती हैं और इसमें बहुत कम लागत की आवश्यकता होती हैं इसलिए यह काफी फायदेमंद व्यवसाय है.
Ans : पापड़ लोग अपने अनुसार विभिन्न चीजों से बनाते हैं जैसे विभिन्न तरह की दालों से, आलू से, साबूदाना से आदि, आप इनमें से किसी भी प्रकार के पापड़ बनाकर बाजार में बेच सकते हैं.
Ans : पापड़ बनाने में उपयोग होने वाली मशीन का सेट खरीदना हैं तो यह आपको 40 से 50 हजार रूपये तक में आसानी से बाजार में उपलब्ध हो सकता है. इसके अलावा अलग – अलग पीस में इसे 13 से 30 हजार रूपये में खरीदा जा सकता है.
Ans : पापड़ बनाने के व्यवसाय की मांग बाजार में बनी रहने की वजह से आप हर महीने 40 हजार रूपये तक की कमाई कर सकते हैं.
Ans : भारत में पापड़ बनाने वाली कंपनियां लिज्जत पापड़, अग्रवाल पापड़, हल्दीराम आदि और भी हैं.
इस ब्लॉग से यह निष्कर्ष निकलता है कि यह एक housewife business भी है जिसका उपयोग करके वह घर बैठे कुछ पैसे कमा सकते हैं। एवं इस व्यापार में अधिक मुनाफा होने की वजह से बहुत सारे उद्यमी है व्यापार कर रहे हैं और आपको भी या व्यापार शुरू कर देना चाहिए जितना जल्द हो सके।
दोस्तों हमने आपको इस ब्लॉग में बताया, how to start papad making business in hindi। अगर आपको यह भी सब पसंद आया हो तो आप इसके लिए हमें कमेंट कर सकते हैं और हमारे वेबसाइट को बुक मार्क करके रख सकते हैं। मैं आशा करता हूं कि मैं आज का विषय how to start papad making business in hindi आप लोगों को अच्छी तरह से समझा पाया हूं। अगर इस विषय पर आप के मन में कोई सवाल है तो आप उसके लिए हमें कमेंट कर सकते हैं।
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]]><p>The post Chai Sutta Bar Franchise Business, Tea Franchise Business India first appeared on Anju Jadon News & Blogs.</p>
]]>The CSB or Chai Sutta Bar brand has its roots in Indore, and Madhya Pradesh, where having a nukkad or adrak chai in a kulhad (clay cup) is part of the local culture. The Chai Sutta Bar menu provides the same tasty chai in an ambience that makes its taste a luxurious experience across its chai franchise operations. And though the name connotes that Sutta or the cigarette is part of the outlet, smoking is disallowed. The growth of the Chai Sutta Bar has brought employment and prosperity to scores of potters and their families, who craft the kulhad or clay pots in which the tea is served at all Chai Sutta Bar outlets. Let us explore the progress of CSB and how you can start your own Chai Sutta Bar franchise.
The tea business, or Chai Business, as it is fondly called in India, ranks number one in the consumer market. Indian people consume coffee and tea regularly throughout the day, and about 80% of the local produce is consumed within the country. The demand for hot tea spikes in winter, but tea is also considered refreshing any time of the day and in any season. Tea as a good business opportunity has been proven by the Chai Sutta Bar, which has over 200 and counting franchisee-outlets all over India. Do you see a profitable opportunity in the Chai Sutta bar franchise operat ion? Here you can find all the franchise details that you need.
The vision of Chai Sutta Bar is to deliver our unique cultural blend and values to each corner of this world. Started 4 years back, we have accomplished great tasks and achieved incredible milestones. 300+ outlets, 150+ cities, countless kulhads, and global presence say it all. Without any boundaries, Chai Sutta Bar is now spreading with wings made of people’s love and affection.
Franchise partners of Chai Sutta Bar are enjoying massive margins and impeccable growth every year. It’s super easy to start a journey with a tested, tried, and high ROI-driven business model. Chai becoming the most consumed beverage, this industry has vast growth potential.
Take the first step and become a part of the family that is ever-growing. Partner with the Most Trusted Brand in the market.
The CSB was founded by these young Indians:
CSB plans to be in every expanding city and has stores with a bar franchise India and abroad like in Canada, the UK, the USA, Dubai, Muscat, whose numbers are growing.
Anubhav, the co-founder, borrowed from friends to fund the initial capital cost of opening a bar in India of a mere ₹2 lakh. Their turnover from 3 lakh tea cups per day across the outlets is worth over 100 Crore, with the CSB net worth exceeding ₹50 Crore!
The Chai Sutta bar franchise in India gets their Assamese tea blended with a proprietary chai masala to make the famed kadak kulhad masala chai. The chocolate tea on their menu is another favourite item among people in India and abroad. A lot of research went into choosing the right idea, menu, products, price, locations that have led to the success of this brand.
The Chai Sutta Bar Franchise is being offered across several locations. For an initial investment of ₹16 lakh, the franchiser anticipates a quick 15 month payback period, and an average of ₹90,000 pm returns every month. That is a smart strategy and even takes the humble tea to a branded international level while promoting Indian artisans (over 5 lakh kulhad per day requirement), reducing plastic and showcasing Indian culture.
Let’s go over the details of the Chai Sutta Bar Franchise:
CSB requires a solid financial backup and the ability to invest from ₹ 16 to 20 lakh.
The experience of the company or entrepreneur is as follows.
Starting the tea café business, beverages and food sections need a commercial area with many footfalls. The area required is from 300 to 2,000 sq. ft close to a railway or bus station, educational institution or shopping high street. You need not own the place. You can rent commercial space at reasonable rents ranging from 20K to 30K in most cities.
For any Indian location, the Chai Sutta Bar Café franchise fee is ₹6 lakh with a required investment of ₹16 lakhs. The Chai sutta bar franchise cost has a return on investment (ROI) of 2%. The breakup in a quick reference table is given below:
Particulars | Investment |
Commercial space | 300 to 400 sq. ft minimum |
Equipment and machinery | ₹ 3 lakh |
Furniture and décor of interiors | ₹ 5 lakh |
Raw materials initial investment | ₹ 2 lakh |
Franchise Fee | ₹ 6 lakh |
Total investment | ₹ 16 lakh |
ROI | 108% |
Payback period | 14 to 18 months |
Royalty fee | 2% of turnover |
Term of agreement | 5 years |
Official website | chaisuttabarindia.com |
Contact details | Tel no: 91-6262300031Email: chaisuttabar@gmail.com or business@chaisuttabarindia.com |
Address for communication | 406, Janjeerwala Square, Silver Arc Plaza, New Palasia, Indore, Madhya Pradesh -452001, India. |
You can expect facts mentioned below and more from the 5-year CSB franchise agreement.
No matter which business idea you choose, here are some tips to help you convert your ideas.
The Chai Sutta Bar story is from rags to riches and from hard work to success. With adequate effort and strategy in entrepreneurship, one can make it into a successful venture. Its growth through the Chai Sutta Bar franchise is another significant opportunity that can aid entrepreneurs like you to start their businesses. The offer is exciting, generous, profitable and very attractive. Therefore, adhere to the business tips and follow the requirements to start your Chai Sutta Bar franchise.
Once you start, you may face problems with accounting, employee management, GST filing, and more. Did you know that small businesses can benefit from a one-stop solution with the other app? Try it out today to free up your time and focus on growing business ideas.
Q: When did Chai Sutta Bar start?
Ans:
Chai Sutta Bar’ started in 2016 July with a small capital of ₹ 2 lakh at Rewa, Indore of Madhya Pradesh. They have 5 own outlets, and the rest are franchised operations.
Q: Does CSB offer franchise opportunities?
Ans:
Yes. The offer for franchisees can be found on their official website.
Q: How much is the turnover of Chai Sutta Bar?
Ans:
Quoting from the MCA details, the company’s authorized share capital is ₹ 10 lakh. The Chai Sutta Bar turnover in the last financial year is indicated as ₹ 100 Crore.
Q: How many Chai Sutta Bar do they have in India?
Ans:
According to the founder, CSB has over 200 exclusive CSB outlets pan-India and abroad.
Q: Is smoking promoted in the Chai Sutta Bar?
Ans:
No. The chai is pitched to keep the younger generation off cigarettes and smoking. They follow a ‘No Smoking’ policy.
Q: How many CSB outlets does India have?
Ans:
Chai Sutta Bar started in Indore, has a unique business model and encourages the artisans to make the Kulhad. Their quality and taste come at affordable prices, and their growth has spurred them to offer franchise operations. At present, they run 135 outlets and hope to have at least 200 such outlets shortly.
Q: How much revenue can be expected from Chai Sutta Bar outlet?
Ans:
With an investment of approximately ₹ 16 to 20 lakh, the payback period is anticipated to be 14 to 18 months. This means Chai Sutta Bar profit margin revenue of over ₹ 90K per month from a single outlet.
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]]>योग्यता : अनपढ़ हो या 8 वी पास भी चलेगा
वेतन : 1,00,000 रूपये महीना
भारत के सभी महिला पुरुष कर सकते है
महिलाओ को पहले नौकरी दी जाएगी
बीमारी की वजह से सभी कंपनी घर बैठे देगी काम
कंपनी से जुड़ने से पहले ध्यान देने वाली बाते :
18 साल से कम उम्र के बच्चे को कम पर नहीं रखा जाएगा
सभी जरूरी दस्तावेज आपको कंपनी की मेल पर सेंड करनी होगी
महिला पुरुष लड़का लड़की कोई भी इस काम को कर सकता है
काम आपको सही समय पर करके देना होगा , अगर आप लगातार तीन बार गलती करेंगे तो आपका एग्रीमेंट खत्म कर दिया जाएगा ,
आपके पास एक बड़ा रूम होना चाहिए , जिसमे आप कंपनी का सामान रख सके , नहीं है तो किराए का भी चलेगा
कंपनी से जुड़ने के बाद लोगो को मिलने वाले फायदे :
आप जितने मर्जी पैकेट ले सकते है , पर आपको अगले 48 घंटे में उसे पैक करके वापस देना होगा
घर बैठे आपको अपने परिवार के साथ काम करने का मौका मिलेगा
अगर अकेला आदमी भी काम करेगा तो भी 50 से 60 हज़ार तक आराम से कमा सकते है ,
महिलाए भी इस काम को कर सकती है ,
आप अपने साथ और लोगो को भी काम पर रख सकते है और अच्छा पैसा कमा सकते है
कंपनी से जुड़ने के लिए जरूरी दस्तावेज :
आधार कार्ड
निवास प्रमाण पत्र
आय प्रमाण पत्र
चार पासपोर्ट साइज फोटो
बैंक में खाता
काम कैसे करना है :
कंपनी से जुड़ने के बाद आपको वहां से कुछ बिन्द्दी मिलेगी जितना आप चाहे , एक किलो बिन्द्दी से आपको एक एक ग्राम के पैकेट बनाने है , इसके लिए आपको एक इलेक्ट्रॉनिक वेट मशीन लेनी होगी जोकि करीब 500 रूपये से मिलनी शुरू हो जाती है , और इन्हे पैक करने के लिए आपको एक स्टेप्लर चाहिए जो मात्र 50 से 200 रूपये का आ जाता है , आपको एक एक ग्राम के पैकेट पैक करने के बाद इन्हे कंपनी की तरफ से दिए गए पेपर शीट ( गत्ता) पर लगा देनी है , एक शीट पर 50 से 100 पैकेट लगाए जाते है , आपको एक शीट तैयार करने के 5 रूपये दिए जाते है , इस तरह से अगर 500 पैकेट तैयार करते है तो आपको 2500 रूपये हर दिन कमाई होगी , इस तरह आप महीने का 75000 तक कमाएंगे ,
सबसे पहले आप तराजू ओर स्टेपलर को आन लाइन नीचे दी हुई लिंंक से खरीदना है
तराजू Wight Machine – https://amzn.to/386tkN5
पिंच मशीन tapler Machine – https://amzn.to/2OAdumi
कैसे करे आवेदन : आवेदन करने के लिए पहले नीचे दिया हुआ विडियो देखे और काम को समझे फिर कंपनी के नंबर दिए गए है आप इन पर कॉल करके काम पा सकते है
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]]>सबसे पहले अगर हम किसी भी बिजनेस की बात कर रहे हैं तो उसमें यह जानना जरूरी है कि उस बिजनेस में आपको करना क्या होगा? तो जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया कि आपका यह बिजनेस काफी कम कंपटीशन का है और आप इसे आसानी से घर बैठे हुए कर सकते हैं। इसमें आपको कुछ नहीं करना है बस थोड़ी सी इन्वेस्टमेंट करके पैकिंग का बिजनेस स्टार्ट करना है। यानी कि इसमें आपको कोई भी सामान को पैक करके रेडी करके आगे मंहगे दामो पर बेचना है
आसान तरीके से समझना हैं तो पैकिंग के बिजनेस में आपको कोई भी सामान जैसे की हल्दी, मिर्ची, दाल, नमक, रंग, रूई बत्ती, अगरबत्ती, गुलाल, मसाले, फल, लेश, बटन, कपडे जैसी चीजे पैक करनी है और उन्हें बेचना है। बेचने का काम आसान रहेगा, अगर आपको किसी काम में थोड़ी सी मेहनत करनी है तो वह पैकिंग का काम है। आपने कई बार देखा होगा कि जब आप दुकान पर कोई मसाला आदि लेने जाते हैं तो वह काफी कम कीमत का मसाला होता है लेकिन अगर वह किसी पाउच में होता है तो उसका दाम बढ़ा हुआ होता है जैसे कि 2 या 3 रूपये के मसाले के 5 रूपये ले लेते है। आप इनकी पैकिंग केसे करना है इसके लिये नीचे दिया विडियो जरूर देखे
आजकल सभी लोगो की बिजी लाइफ में लोगो को इतना समय भी नहीं होता कि हम कुछ रुपयों को लेकर इतना सोचे क्योंकि ऐसी चीजें हमें किसी विशेष कार्य नहीं चाहिए जैसे की पूजा आदि। चाहो तो काफी कमा सकते हो। ऐसे ही छोटे छोटे आइटम को पैक करके बेचने में। आपने बाजार में एक सेट देखा होगा कि दिवाली के समय पर अक्सर दुकानों पर मिलता है। उसमें आपको पूजन सामग्री मिलती है और वह काफी कम मात्रा में होती है लेकिन उन 10 या ₹20 की पूजन सामग्री के हम आसानी से 30 या ₹40 निकाल के दे देते हैं क्योंकि इससे हमारा पूरा काम हो जाता है और हमें अलग-अलग जगह से सामग्री को इकट्ठा करने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन ऐसा काफी कम होता है कि वह दुकानदार इस पैकिंग को बनाता हो। क्योंकि इसे वह नहीं बल्कि गृह उद्योग के रूप में अन्य लोग बनाते हैं और वह दुकानदार को कुछ अधिक दाम में बेचते हैं और इसी चीज को पैकिंग का बिजनेस कहते है।
पैकिंग का बिजनेस शुरू करने में ज्यादा लागत की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर आप थोड़े अच्छे पैसे भी खर्च करना चाहे तो मैं तो आप इसे 5000 से शुरुआत कर सकते है। अगर इस इन्वेस्टमेंट से आय की बात करें तो अगर आप इनवेस्टमेंट करने के बाद मेहनत करें और अच्छे से काम करे तो आप इसमें 50,000 तक कमा सकते हैं।
इस बिजनेस की खास बात यह हैं की इसे आपके घर में जितने भी व्यक्ति मौजूद है वह सब फ्री होकर कर सकते हैं और आपको इसमें कोई बाध्यता भी नहीं होगी कि इसे करना जरूरी है या नहीं की कई महीनों में जाए आपका खुद का व्यवसाय जैसा होगा। अगर कुछ फर्क है तो वह यह है कि इसमें आपको कम लागत लगानी होगी और अधिक पैसा प्राप्त होगा लेकिन मेहनत भी करनी होगी।
इसमें जो पैसे खर्च हुए वह आपके पैकिंग पाउच लाने में खर्च होंगे। आजकल मार्केट में मुख्यतः दो तरह के पैकिंग पाउच आते हैं जिनमें से एक साधारण होता है जिसे पैक करने के लिए आपको 1000 की मशीन लानी होगी। वहीं दूसरी तरफ जीप वाले पहुंचाते हैं जिन्हें किसी मशीन की जरूरत नहीं पड़ती और उसमें रेमेडी डाल कर आप अपने हाथों की मेहनत से ही उन्हें ठीक कर सकते हैं। यह साधारण पाउच के मुकाबले अधिक सेफ रहते हैं लेकिन थोड़े से महंगे होते है पर कुल मिलाकर आपको फायदेमंद भी यही होंगे।
पैकिंग का बिजनेस शुरू कर के पैसे कमाने काफी आसान है। मैं आपको इस बिजनेस से पैसे कमाने के बारे में Step By Step Explain करने वाला हूँ।
आप पैकिंग के बिजनेस के लिए जो भी मसाले सिलेक्ट करना चाहते हैं उसे सबसे पहले खरीदे। आप अलग अलग समय के हिसाब से अलग-अलग मसाले खरीद सकते हैं जैसे कि साधारण समय में मसाले आदि और दिवाली व होली के समय में पूजन सामग्री व रंग आदि। मैं आपको यही राय दूंगा की शुरुआत में आपने ज्यादा मात्रा में ना खरीदें क्योंकि अगर आपकी आय नहीं हो पाई तो आपके लिए यह घाटेमन्द भी साबित हो सकता है।
पैकिंग के सामान के बारे में हम पहले ही जिक्र कर चुके है। अगर आप एक साधारण पाउच लाना चाहते हैं तो उसके साथ आपको मशीन भी लानी पड़ेगी जो बिजली से चलेगी लेकिन अगर आप यह वाला पाउच लाते हैं तो अधिक बेहतर रहेगा। अगर आप चाहे तो अधिक सेल के लिए पाउच पर प्रिंट कर सकते हैं पहले से ही प्रिंट वाला पाउच भी ला सकते हैं।
अब आपको अपनी मसाले को पिक करना है यह आप जब चाहे तब कर सकते हैं और अधिक से अधिक करने का मतलब अधिक से अधिक लाभ होगा। अपने मसाले को उसी हिसाब से पैक करें जिससे कि खरीददार का नुकसान भी ना हो और आपका फायदा भी हो जाए।
अब आपके सामान को बेचने की बारी है। आप अपने सामान को इस क्वालिटी का रखें कि दुकानदार उसे एक बार देखते ही खरीद ले। अगर आप सामान ₹5 में बेचना चाहते हैं तो दुकानदार को है 3.50 या 4 रूपये में बेचे जिससे की उसे अच्छा कमीशन मिले और वह आपके सामान को जल्दी खरीदे। अगर आपका सामान बिकने लगा तो वह आगे होकर आपको ऑर्डर देने लगेगा। त्योहारों के संबंध में अधिक और विशेष सामान पैकिंग करें जिससे कि आपका फायदा हो।
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